उत्तराखंड में पशुओं के लिए 34 एंटीमाइक्रोबियल दवाओं पर लगाया प्रतिबंध

देहरादून। देशभर में प्रतिबंधित कफ सिरप और पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटी माइक्रोबियल दवाओं को लेकर छापेमारी और कड़ा नियंत्रण जारी है। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी बच्चों को दिए जाने वाले कफ सिरप के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
साथ ही, पशुओं को दी जाने वाली 15 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल्स और एक एंटी प्रोटोजॉल्स दवा पर भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश के बाद प्रतिबंध लगाया गया है। उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं ड्रग्स प्रशासन (FDA) ने अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के आदेश के तहत पशुओं की इन दवाओं के आयात, निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है।
प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स में यूरिडोपेनिसिलिन, सेफ्टोबिप्रोल, सेफ्टारोलाइन, कार्बापेनेम्स, पेनेम्स, मोनोबैक्टम्स, ग्लाइकोपेप्टाइड्स, लिपोपेप्टाइड्स, ऑक्साजोलिडिनोन्स, फिडैक्सोमिसिन, प्लाजोमिसिन, ग्लाइसिलसाइक्लिन्स, एरावासाइक्लिन और ओमाडासाइक्लिन शामिल हैं।
इसी तरह, पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल्स में अमैंटाडाइन, बालोक्साविर मार्बॉक्सिल, सेल्गोसिविर, फेविपिराविर, गैलिडेसिविर, लैक्टिमिडोमाइसिन, लैनिनामिवीर, मेथिसाजोन/मेटिसाजोन, मोलनुपिराविर, निटाजोक्सानाइड, ओसेल्टामिवीर, पेरामिविर, रिबाविरिन, रिमांटाडाइन, टिज़ोक्सानाइड, ट्रायजाविरिन, उमिफेनोविर और जानामिवीर शामिल हैं। इसके अलावा, निटाजोक्सानाइड नामक एंटी प्रोटोजॉल्स पर भी रोक लगाई गई है।
FDA के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम बच्चों और पशुओं की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। प्रतिबंधित दवाओं के उपयोग या बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता से अपील की गई है कि केवल प्रमाणित और सुरक्षित दवाओं का ही प्रयोग करें।
