नियम-58 के तहत किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने भूमिधर अधिकार और विस्थापन का मुद्दा उठाया

मुकेश कुमार संवाददाता/अमन केसरी न्यूज

किच्छा :- किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने विधानसभा में नियम-58 के अंतर्गत अविलंबनीय लोक महत्व का विषय उठाते हुए धौराडाम-नजीबाबाद क्षेत्र सहित कई गांवों में रह रहे सैकड़ों परिवारों को भूमिधर अधिकार दिए जाने की मांग की।
विधायक बेहड़ ने कहा कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत धौराडाम-नजीबाबाद क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों परिवार कई दशकों से कृषि कार्य कर रहे हैं, लेकिन राज्य गठन के बाद भी उन्हें भूमिधर अधिकार प्राप्त नहीं हो सके हैं। आजादी के बाद से अब तक यहां के लोगों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखकर धौराडाम क्षेत्र को परिसंपत्तियों के बंटवारे में उत्तराखंड में शामिल किए जाने की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र में खुर्पिया, तुर्कागौरी, गौरीकलां तथा शांतिपुरी नंबर-05 जैसे कई गांवों में भी भूमि और अधिकारों से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।
विधायक बेहड़ ने कहा कि प्रदेश में प्रयाग फार्म क्षेत्र में लोगों को उजाड़ा गया है तथा नगला क्षेत्र में भी लोगों को हटाने की बात चल रही है। इसी प्रकार पंतनगर एयरपोर्ट विस्तारीकरण के नाम पर भी कई परिवारों को विस्थापित किए जाने की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उजाड़ने की बात तो करती है, लेकिन लोगों को बसाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं करती, जो अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों का मामला भी उठाते हुए वहां के लोगों को राहत देने की मांग की। साथ ही गदरपुर में गूलरभोज रोड पर नहर किनारे बसे लोगों को आज तक मालिकाना हक नहीं मिल पाया है, उत्तराखंड पटवारी के बाद कई नेहरू का भी मलिक आना आज तक प्रदेश को नहीं प्राप्त हो पाया है, इसके लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह विषय जनहित से जुड़ा हुआ है और वर्षों से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों का प्रश्न है, इसलिए उन्होंने नियम-310 के तहत सदन की कार्रवाई रोककर इस पर चर्चा की की मांग की ।
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