March 11, 2026

रुद्रपुर में शिक्षा व्यापार की फैलती जड़ें, व्यापार के चलते मासूमों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

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मुकेश कुमार संवाददाता/अमन केसरी न्यूज

 

रुद्रपुर :- रुद्रपुर में शिक्षा का व्यापार भली भांति फल फूल रहा है स्कूल संचालक विभागीय अधिकारियों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं जहां शिक्षा को देश के भविष्य निर्माण का आधार माना जाता है वहीं जनपद ऊधम सिंह नगर में शिक्षा अब महज एक ‘मुनाफे का सौदा’ बनकर रह गई है। जिले के हर गली-कूचों में अवैध स्कूल न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें जिला मुख्यालय के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र से एक ताजा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अवैध स्कूलों के व्यवसाय संगठन की पोल खोलकर रख दी है।

हैरानी की बात यह है कि जनपद में कई ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनके पास न तो भवन के मानक हैं और न ही योग्य शिक्षक। कम पढ़े-लिखे और रसूखदार लोग इन ‘शिक्षा की दुकानों’ को चला रहे हैं। और मान्यता प्राप्त विद्यालयों से इन अवैध स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है वे मान्यता प्राप्त विद्यालय, जो चंद रुपयों के लालच में अपना नाम और पंजीकरण इन माफियाओं को ‘किराए’ पर दे देते हैं। इसका एक जीता-जागता उदाहरण ट्रांजिट कैंप स्थित ‘मॉडर्न पब्लिक स्कूल’ में देखने को मिला। वर्षों से यह स्कूल पूरी तरह अवैध रूप से चल रहा है, लेकिन इसके पास ‘कागजी कवच’ किसी और का है। मामला तब खुला जब एक जागरूक अभिभावक ने अपने बच्चे का दाखिला किसी अन्य प्रतिष्ठित विद्यालय में कराना चाहा। स्कूल ने बच्चे का रिजल्ट तो ‘मॉडर्न पब्लिक स्कूल’ के नाम से थमाया, लेकिन जब ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) की बारी आई, तो वह दिनेशपुर के ‘न्यू ऑक्सफोर्ड जूनियर हाई स्कूल के नाम से जारी की गई। पूर्व में भी एक विद्यालय के बच्चों द्वारा इस स्कूल का खुलासा किया गया था।

अभिभावकों का आरोप है कि अवैध रूप से चल रहे इस स्कूल ने महीनों तक उन्हें टीसी के लिए चक्कर कटवाए।
ट्रांजिट कैंप में पढ़ने वाले बच्चे की टीसी दिनेशपुर का स्कूल कैसे जारी कर रहा है यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है सूत्रों की मानें तो यह एक बड़ा रैकेट है, जहां रुद्रपुर के अवैध स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का नाम कागजों में दिनेशपुर या अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के मान्यता प्राप्त स्कूलों में दर्ज दिखाया जाता है। परीक्षा के समय ये मान्यता प्राप्त स्कूल मोटी रकम लेकर रिजल्ट और सर्टिफिकेट बेचते हैं। इस पूरे प्रकरण में जिला शिक्षा विभाग इन शिक्षा माफियाओं के सामने बौना साबित होता नजर आ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी किसी अवैध स्कूल की शिकायत होती है, विभाग एक नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पाडला झाड़ लेता है। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, लेकिन कभी भी शिक्षा की इन ‘अवैध दुकानों’ पर ताला नहीं जड़ा जाता। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि विश्वसनीय सूत्रों का दावा है शिक्षा महकमे ने इन अवैध संस्थानों को अभयदान दिया है। यह विभाग की ही शह है कि आज अनपढ़ लोग भी शिक्षाविद बनकर बच्चों के भविष्य की नीलामी कर रहे हैं।

यदि समय रहते इस ‘नेटवर्क’ को ध्वस्त नहीं किया गया, तो ऊधम सिंह नगर की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। हजारों बच्चों के दस्तावेजों की वैधता पर भविष्य में तलवार लटक सकती है। अभिभावक ठगे जा रहे है, आखिर कब तक रसूख और पैसों के दम पर शिक्षा का यह ‘काला खेल’ चलता रहेगा? क्या ज़िला प्रशासन और शासन के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर इन अवैध स्कूलों और उनके मददगारों पर कठोर कार्रवाई करेंगे, या फिर नौनिहालों का भविष्य इसी तरह बाजार में बिकता रहेगा?

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