58 करोड़ का ज़मीन घोटाला: DM, दो IAS और PCS अफसर सस्पेंड!

हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ी कार्रवाई – दो IAS और एक PCS अधिकारी सस्पेंड
उत्तराखंड के हरिद्वार में सामने आए करोड़ों के भूमि घोटाले में धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है। अब तक इस मामले में कुल 12 अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है।
हरिद्वार जिले के सराय गांव में नगर निगम द्वारा खरीदी गई 2.3070 हेक्टेयर भूमि अब एक बड़े घोटाले का कारण बन गई है। आरोप है कि कृषि भूमि को धोखे से ‘143’ के अंतर्गत दर्ज करवाकर नगर निगम अधिकारियों ने इसे बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत, यानी लगभग 58 करोड़ रुपए में खरीदा।
इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी, जब निकाय चुनावों के दौरान आचार संहिता लागू थी और नगर निगम ने कथित रूप से जल्दबाज़ी में इस ज़मीन को खरीद लिया।
तीन बड़े अफसर सस्पेंड:
1. कर्मेंद्र सिंह – जिलाधिकारी और नगर निगम प्रशासक, हरिद्वार
2. वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त, हरिद्वार
3. अजयवीर सिंह – उपजिलाधिकारी, भगवानपुर
इन अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने न केवल शासनादेशों की अनदेखी की बल्कि नगर निगम अधिनियम 1959 के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया।
जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने अपनी रिपोर्ट में इन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया, जिसके बाद शासन ने यह कड़ी कार्रवाई की।
इतना ही नहीं, आज 3 जून को कुल सात अफसर सस्पेंड किए गए हैं, जिनमें वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, कानूनगो राजेश कुमार, वैयक्तिक सहायक विक्की और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास शामिल हैं।
अब तक इस घोटाले में 10 अधिकारी सस्पेंड, एक का सेवा विस्तार समाप्त और एक की सेवाएं पूरी तरह से खत्म कर दी गई हैं।
✔️ 12 अधिकारियों पर एक्शन
✔️ 10 सस्पेंड
✔️ 1 संपत्ति लिपिक – सेवा विस्तार समाप्त
✔️ 1 सहायक नगर आयुक्त – सेवा समाप्त
इस ज़मीन की खरीद पर नगर निगम मेयर किरण जैसल ने भी सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामला तूल पकड़ता गया। अब इस कार्रवाई से साफ है कि राज्य सरकार इस घोटाले को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
