पंजाब नेशनल बैंक को कोर्ट से झटका, सरफेसी एक्ट के तहत प्रार्थना पत्र खारिज..

रुद्रपुर में कर्जदार को बड़ी राहत मिली है। अपर जिलाधिकारी नजूल एवं प्रशासन पंकज उपाध्याय की कोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक द्वारा दाखिल सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत संपत्ति कब्जे की अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने ऋणी को छह महीने की अंतिम मोहलत देते हुए बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
रुद्रपुर निवासी अर्पित राज कक्कड़ ने वर्ष 2020 में रेडीमेड गारमेंट्स के व्यापार के लिए पंजाब नेशनल बैंक से 17 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसके बदले में उन्होंने अपने माता-पिता की संपत्ति ग्राम रम्पुरा स्थित मकान को बैंक में गिरवी रखा।
कोरोना काल में व्यापार प्रभावित हुआ, लेकिन फिर भी उन्होंने 10 लाख रुपये की किश्त चुकाई। शेष राशि का भुगतान न होने पर बैंक ने उनके खाते को एनपीए घोषित कर दिया और संपत्ति को 28.54 लाख रुपये में बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
कर्जदार ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि उनकी संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य 70 लाख रुपये से भी अधिक है, जिसे स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट से भी पुष्टि मिलती है, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों ने साजिशन संपत्ति का कम मूल्यांकन कर निजी लाभ के लिए बिक्री की योजना बनाई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बैंक ने कर्जदार को विधिवत नोटिस नहीं दिया और एक झूठा शपथ पत्र भी दाखिल किया कि मामला किसी अन्य कोर्ट में लंबित नहीं है, कर्जदार ने पहले ही कोर्ट में 10 लाख रुपये के दो ड्राफ्ट जमा किए थे और 5 लाख रुपये पहले ही बैंक को दिए जा चुके थे।
कोर्ट ने बैंक की कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि जमा की गई राशि को ऋण खाते में समायोजित किया जाए और कर्जदार को छह माह का अंतिम अवसर दिया जाए ताकि वह शेष रकम जमा कर सके।
इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि यदि उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन न किया जाए, तो बैंक की कार्रवाई भी कोर्ट में खारिज हो सकती है। अब देखना होगा कि कर्जदार इस राहत के बाद समय पर बकाया चुका पाता है या नहीं।
