February 16, 2026

हल्द्वानी वन विकास निगम में फर्जी बिल घोटाले का पर्दाफाश, विजिलेंस जांच की तैयारी तेज

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हल्द्वानी।

वन विकास निगम हल्द्वानी में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने विभाग से लेकर शासन तक हड़कंप मचा दिया है। निगम के कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अस्तित्वहीन रेस्टोरेंट के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग करने की कोशिश की। मामला गंभीर होने के बाद अब इसे विजिलेंस जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

 

शिकायतकर्ता के एफिडेविट से खुला पूरा मामला

यह घोटाला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने एफिडेविट के साथ विजिलेंस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में फर्जी रेस्टोरेंट बिल की कॉपी और अन्य सबूत भी उपलब्ध करवाए गए। विजिलेंस ने मामले पर शासन को पत्र लिखकर जानकारी मांगी, जिसके बाद शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से तथ्य जांचे। जांच में खुलासा हुआ कि हल्द्वानी में उस नाम से कोई रेस्टोरेंट मौजूद ही नहीं है।

 

प्राथमिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा

सतर्कता अधीक्षक देहरादून की ओर से हुई जांच में पता चला कि निगम के अधिकारियों ने सांठगांठ कर फर्जी रेस्टोरेंट के नाम पर बिल बनवाए। बिल में जो भोजन व्यंजन दर्ज थे, उन्हें लेकर जब खाद्य सुरक्षा विभाग से पुष्टि की गई तो उन्होंने भी स्पष्ट कहा—ऐसा कोई रेस्टोरेंट शहर में पंजीकृत ही नहीं है। यानी बिल पूरी तरह मनगढ़ंत था।

 

वाउचर भी गलत, दस्तावेज भी संदिग्ध

विभागीय प्राथमिक जांच में यह भी पाया गया कि बिल के साथ लगाए गए वाउचर और दस्तावेज भी फर्जी थे। शासन ने इसे प्रथम दृष्टया जालसाजी और भ्रष्टाचार का मामला मानते हुए वन विभाग से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं।

 

बीएनएस की कई धाराओं में केस बन सकता है

शासन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में बीएनएस की धारा 316, 335, 336, 338, 339 और 61 के उल्लंघन के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लागू होते दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

 

जल्द हो सकती है बड़ी कार्रवाई

फर्जी रेस्टोरेंट बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने के इस घोटाले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन के सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में न केवल एफआईआर दर्ज होगी, बल्कि कई बड़े अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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