February 16, 2026

सरकार की अस्पष्ट नीति भी अतिक्रमण का मुख्य कारण, समाजसेवी जेबी सिंह की कलम से

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दो दिन व्यवसायिक यात्रा पर पूने में व्यस्त रहने के कारण दूसरी कड़ी लिखने में विलंब हुआ। जिन लोगों ने मेरी पहली पोस्ट पर सवाल खड़े किए थे कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने से पहले लोगों को सोचना चाहिए था उन्हें मेरी इस पोस्ट में अपने जबाब खोजने चाहिए। अतिक्रमण के लिए बेरोजगारी तो प्रमुख वजह है ही, सरकार की अस्पष्ट नीति भी इसमें प्रमुख कारण है।

आश्चर्यजनक परन्तु सत्य,सरकार ऐसी जगहों पर बैठे लोगों को बिजली कनेक्शन, तहबाजारी, आधार कार्ड और वोटर कार्ड जैसी वह सारी सुविधाएँ प्रदान करती है, जिससे उन्हें लगता है अब तो हम पक्की तरह से इसके मालिक हो गए। इस व्यस्था में कुछ दलाल किस्म के लोग भी घुस जाते हैं जो ऐसी भूमि पर कब्जा कर उसे स्टाम्प पेपर पर ऊँचे दामों पर बेच निकल लेते हैं। रुद्रपुर में भी मूल कब्जेदार कम ही बचे थे। कइयों ने तो भारी कीमत पर यह जगहें खरीदी थीं। इस अतिक्रमण को रोकने वाली उत्तरदायी संस्थाएं, स्थानीय नेताओं के दबाव या माल पानी लेकर अपनी आंखे मूंद लेती हैं। इससे यह प्रवृत्ति खूब फलती फूलती है।
मैने पहली किश्त में लिखा था कि सरकारी लोग जिम्मेदारी कम और खाना पूर्ति अधिक करते हैं। आप ने सामान्यतः देखा होगा कि अतिक्रमण हटाकर वे कुछ समय बाद झाँककर भी नहीं देखते कि वहाँ पुनः अतिक्रमण हो गया, अभी रुद्रपुर बाजार में कुछ वर्ष पहले ही अतिक्रमण हटाया गया और लोग धीरे धीरे फुटपाथ पर पुनः कब्जा करने लगे। आगे चलकर कुछ दुस्साहसी लोग अस्थाई निर्माण कर लेंगें, उन्हे देखकर अन्य लोग भी ऐसा करने को प्रेरित होंगें या विवश होंगें।
कहने का मतलब इसके लिए सरकारें जब तक स्पष्ट नीति नही बनाएगी, तब तक अतिक्रमण और अतिक्रमण हटाने जैसी सुखद और दुखद घटनाएं होती रहेंगी। इस कड़ी में हमने सरकारी व्यवस्था को समझा। आगे राजनैतिक दलों और दलालों की भूमिका को समझाने का प्रयास करूँगा। •••••••क्रमशः

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